Guru Vishwamitra: 22 जनवरी को अयोध्या में होने वाले राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं. रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर अयोध्या के साथ पूरा देश इस समय राममय हो गया है. ऐसे में तुलसीदास द्वारा लिखी गई राम की कहानी विस्तार से बता रहे हैं. मंदिर परिसर में भगवान श्री राम के गुरु विश्वमित्र का भी एक मंदिर बनाया गया है. ऐसे में आज हम जानते हैं गुरु विश्वामित्र ने भगवान राम के हाथों ताड़का का वध कराया और फिर अहिल्या का उद्धार किया.

बता दें कि ऋषि विश्वामित्र की आज्ञा पर श्री राम ने ताड़का का वध किया था. बता दें कि ऋषि विश्वामित्र अपने आश्रम में 100 वां यज्ञ कर रहे थे. लेकिन हर की तरह इस बार भी राक्षसों ने आकर यज्ञ विध्वंस कर दिया था और ऋषि मुनियों को प्रताड़ित करते रहे. बार-बार प्रयास के बाद जब उनका यज्ञ पूरा नहीं हो पाता था, तो विश्वामित्र काफी दुखी हो जाते और यज्ञ पूरा करने के लिए उपाय की तलाश करते

ध्यान अवस्था के दौरान उन्हें ये ज्ञात हुआ कि राजा दशरथ के यहां भगवान विष्णु ने प्रभु श्री राम के रूप में जन्म लिया है. इसके बाद ऋषि विश्वामित्र अयोध्या पहुंचकर विश्वामित्र से श्री राम और लक्ष्मण से यज्ञ रक्षा की मांग करते हैं. लेकिन राजा दशरथ ये कहते हुए इंकार कर देते हैं कि वे अभी बहुत छोटे हैं. इसके साथ ही वे अपनी सेना के साथ जानें को तैयार हो जाते हैं.

ऋषि विश्वामित्र राजा दशरथ की इस बात से क्रोधित हो जाते हैं और उन्हें श्राप देते हैं. तभी गुरु वशिष्ठ विश्वामित्र को शांत करते हैं और राजा दशरथ को समझाते हैं. गुरु वशिष्ठ की बात मानकर राजा दशरथ श्री राम और लक्ष्मण को ऋषि विश्वामित्र के साथ भेज देते हैं. रास्ते में प्रभु श्री राम ताड़ाक नामी राक्षस का वध करते हैं.

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